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Hindi24 अक्टू॰ 2026 · 6 मिनट पढ़ें

गोवर्धन परिक्रमा कैसे करें: 21 किलोमीटर की पूरी जानकारी

ब्रज में कहावत है कि गिरिराज जी की परिक्रमा में थकान नहीं, आनंद मिलता है। कहा जाता है कि द्वापर में श्रीकृष्ण ने इसी पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। तब से लोग इस पर्वत को सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर अपने दाहिने हाथ की ओर रखते हुए परिक्रमा करते आए हैं।

अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो मन में कई सवाल होंगे: कहाँ से शुरू करें, कितना चलना पड़ेगा, कौन से पड़ाव आएँगे और बुज़ुर्गों के लिए क्या रास्ता है। इस लेख में सब कुछ सीधी भाषा में बताया गया है।

परिचय: गिरिराज जी और परिक्रमा

श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध में अध्याय 24 और 25 में गोवर्धन लीला का वर्णन है। ब्रजवासी हर वर्ष इंद्र की पूजा करते थे। कृष्ण ने नंद बाबा से कहा कि हमारी असली सहायता तो गोवर्धन पर्वत करता है, जो गायों को घास और जल देता है। लोगों ने पर्वत की पूजा की और अन्नकूट अर्पित किया। क्रोधित इंद्र ने सात दिन वर्षा की, और कृष्ण ने पर्वत उठा लिया।

लोक मान्यता है कि ऋषि पुलस्त्य के श्राप से यह पर्वत रोज़ एक सरसों के दाने के बराबर घटता है। यह मान्यता स्थानीय और पौराणिक परंपरा की है, इसे श्रद्धा से सुना जाता है। आज गोवर्धन लगभग आठ किलोमीटर लंबी एक नीची पहाड़ी की रेखा है।

मुख्य जानकारी: कितनी लंबी है परिक्रमा

आम गणना के अनुसार परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की है, हालाँकि अलग-अलग स्रोत थोड़ा अलग आँकड़ा बताते हैं। एक छोटी परिक्रमा भी बताई जाती है, लगभग 7 किलोमीटर की, जिसके बारे में स्थानीय गाइड से पुष्टि कर लें।

पैदल पूरी परिक्रमा में छह से आठ घंटे लगते हैं। ई-रिक्शा से रुकते-रुकते लगभग तीन से चार घंटे लग जाते हैं। मथुरा रेलवे स्टेशन से गोवर्धन लगभग 25 किलोमीटर है और सड़क से पैंतालीस से साठ मिनट का रास्ता है।

योजना और समय: कब और कितने बजे चलें

अक्टूबर से फरवरी तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। सुबह तड़के या शाम के समय चलना आसान रहता है। गर्मियों में तपती सड़क पर नंगे पाँव चलना बहुत कठिन हो जाता है, इसलिए नौ बजे से पहले या देर शाम को चलें।

पूर्णिमा, रविवार और गुरु पूर्णिमा पर भीड़ बहुत अधिक होती है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पर भी बड़ी भीड़ रहती है। गुरु पूर्णिमा के मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं, और उन दिनों गाड़ियाँ शहर से बाहर ही रोक दी जाती हैं। जाने से पहले पंचांग और स्थानीय प्रशासन की सूचना देख लें।

मार्ग और पड़ाव

अधिकतर लोग दान घाटी मंदिर अथवा मानसी गंगा से आरंभ करते हैं। मानसी गंगा में स्नान या आचमन करके, गिरिराज जी को प्रणाम करके चलना परंपरा है। पास में हरिदेव मंदिर है, जिसे गोवर्धन का प्राचीन मंदिर कहा जाता है।

रास्ते में राधा कुंड और श्याम कुंड आते हैं, जो ब्रज के सबसे पवित्र सरोवर माने जाते हैं। इसके पास कुसुम सरोवर है, जहाँ भरतपुर के राजाओं की बनवाई सुंदर छतरियाँ हैं। आगे जतीपुरा में मुखारविंद है, जहाँ पुष्टिमार्ग के अनुसार श्रीनाथ जी प्रकट हुए थे। दक्षिणी छोर पर पूंछरी का लौठा है। इन सभी के विवरण के लिए हमारे गाइड पेज देखें।

रास्ते में जगह-जगह गिरिराज जी की शिलाएँ पूजी जाती हैं, मोर घूमते हैं और भजन मंडलियाँ बैठी मिलती हैं।

समय: कितने घंटे और कैसे बाँटें

पैदल चलने वाले आम तौर पर बीच में दो या तीन जगह रुकते हैं: मानसी गंगा या राधा कुंड पर चाय और विश्राम, और जतीपुरा पर थोड़ी देर। यदि सुबह छह बजे शुरू करें तो दोपहर तक पूरी हो सकती है। मंदिर आमतौर पर दोपहर में बंद रहते हैं, इसलिए दर्शन के लिए सुबह का समय रखें।

रात की परिक्रमा भी लोग करते हैं, पर रात में खाने की दुकानें कम खुली मिलती हैं, इसलिए पहले भोजन कर लें और पानी साथ रखें।

यात्रा: पैदल, ई-रिक्शा या कार से

परंपरा पैदल चलने की है, जितना हो सके नंगे पाँव, पर जिन्हें कठिनाई हो वे चप्पल और मोज़े पहन सकते हैं। बुज़ुर्गों और छोटे बच्चों के लिए ई-रिक्शा सुविधाजनक है। कुछ हिस्सों में कार से भी जाया जा सकता है, पर परिक्रमा मार्ग पर वाहनों के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए स्थानीय स्तर पर पूछ लें।

ई-रिक्शा वाले कई बार प्रति व्यक्ति किराया बताते हैं। अच्छा तरीका यह है कि पूरी परिक्रमा का एकमुश्त किराया पहले तय कर लें। गाड़ी से आने वाले श्रद्धालु शुरुआती बिंदु पर उतरकर कहें कि गाड़ी अंतिम बिंदु पर मिले।

सावधानियाँ और सुझाव

पीने का पानी अपने साथ रखें और गर्मियों में ओआरएस भी। बीच-बीच में कटे फल और खुली चटनी से बचें। कुछ पंडे या दुकानदार जबरदस्ती गिरिराज पूजा के नाम पर बड़ी दक्षिणा माँग सकते हैं। आप हाथ जोड़कर विनम्रता से मना कर सकते हैं।

बंदर चश्मे, टोपी और फोन छीन लेते हैं, इसलिए सामान बंद थैले में रखें। भीड़ वाले दिनों में परिवार के सदस्य एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चलें और मिलने की जगह तय कर लें। महिलाएँ समूह में चलें। जिनके घुटनों में तकलीफ है, वे डॉक्टर की सलाह लेकर ही पैदल चलें। जितना हो सके उतना चलना भी पुण्य माना गया है।

संबंधित गाइड पेज

हमारे गाइड में गोवर्धन परिक्रमा, दान घाटी, मानसी गंगा, राधा कुंड, कुसुम सरोवर, जतीपुरा और पूंछरी के अलग पेज हैं, जिनमें समय, पार्किंग और दूरी दी गई है। भोजन के लिए गोवर्धन परिक्रमा का भोजन लेख और गुरु पूर्णिमा का लेख भी देखें।

lala:Cab से मदद

lala:Cab का ड्राइवर आपको शुरुआती पड़ाव पर छोड़ता है, अंतिम बिंदु पर प्रतीक्षा करता है और भीड़ के दिनों में अनुमति वाली पार्किंग पहले से जानता है। बुज़ुर्ग साथ हों तो हम ई-रिक्शा का इंतज़ाम भी करवा सकते हैं। आप बस अपना हिस्सा निभाइए और श्रद्धा के साथ चलिए, बाकी रास्ता हम सँभालेंगे।

आपके सवाल

गोवर्धन परिक्रमा कितने किलोमीटर की है?

आम गणना के अनुसार लगभग 21 किलोमीटर। अलग-अलग स्रोत थोड़ा अलग आँकड़ा देते हैं।

परिक्रमा में कितना समय लगता है?

पैदल छह से आठ घंटे और ई-रिक्शा से लगभग तीन से चार घंटे, पड़ावों के साथ।

क्या कार से परिक्रमा हो सकती है?

कुछ हिस्से कार से हो सकते हैं, पर नियम बदलते रहते हैं। ई-रिक्शा अधिक प्रचलित है।

परिक्रमा कहाँ से शुरू करें?

दान घाटी मंदिर अथवा मानसी गंगा से। दोनों के पास पार्किंग मिल जाती है।

स्थानीय रूप से जाँच लें

समय, नियम और शुल्क बदलते रहते हैं। कृपया उसी दिन मंदिर या अपने ड्राइवर से पुष्टि कर लें।

  • परिक्रमा की सही लंबाई और छोटी परिक्रमा का मार्ग
  • परिक्रमा मार्ग पर वाहनों के नियम
  • ई-रिक्शा का किराया
  • त्योहार पर मार्ग परिवर्तन
स्रोत
इस कथा के स्थान

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यदि आप ऐसा ड्राइवर चाहते हैं जो गलियाँ और समय जानता हो, तो lala:Cab ऐप तैयार है। कोई अग्रिम नहीं।