1 दिन
मथुरा में जन्मस्थान, द्वारकाधीश और विश्राम घाट। वृंदावन में बाँके बिहारी (समय मौसम के अनुसार बदलता है), ISKCON और शाम को प्रेम मंदिर। दोपहर में मंदिर बंद रहते हैं, उस समय भोजन और आराम।
2 दिन
पहला दिन मथुरा और वृंदावन। दूसरा दिन गोवर्धन, राधा कुंड, बरसाना की राधा रानी का मंदिर और नंदगाँव। रात वृंदावन में लाला धाम में रुकना आरती के लिए सुविधाजनक रहता है। चाहें तो दूसरे दिन आगरा रख लें, बस ताजमहल शुक्रवार को बंद रहता है।
3 दिन
तीसरे दिन गोकुल, महावन और रावल, जहाँ कान्हा का शैशव और राधा जी का जन्मस्थान माना जाता है। दाऊजी का मंदिर समय हो तो जोड़ लें। इस क्रम में बुज़ुर्गों के लिए भी जगह रहती है।
हमारा तरीका
हम गीता में श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलते हैं: हर स्थान पर धर्म का ध्यान और सब कुछ की ज़िम्मेदारी हमारी। न कमीशन वाली दुकानों पर रुकवाना, न मंदिर के द्वार पर दबाव।