घंटे के हिसाब से क्यों ठीक है
वृंदावन और मथुरा 12 किमी दूर हैं और देखने की ज़्यादातर जगहें कुछ किमी की गलियों में हैं। साधारण टैक्सी दिन भर रुकती-चलती रहेगी। घंटे वाले पैकेज में ड्राइवर आपके साथ रहता है, मंदिर के बाहर इंतज़ार करता है और बुज़ुर्गों के लिए नज़दीकी द्वार जानता है।
एक दिन की सामान्य योजना
- सुबह तड़के: ISKCON की मंगला आरती, फिर पास में कचौड़ी-सब्ज़ी का नाश्ता।
- सुबह: बाँके बिहारी, जिनका समय मौसम के अनुसार बदलता है।
- दोपहर: मंदिर विश्राम करते हैं। भोजन और कुल्हड़ की लस्सी का समय।
- शाम: अँधेरे के बाद प्रेम मंदिर और मथुरा में विश्राम घाट की यमुना आरती।
शहर से आगे
गोवर्धन मथुरा से करीब 25 किमी, गोकुल करीब 15 किमी, बरसाना 43 और नंदगाँव 48 किमी हैं। हम गीता के बताए मार्ग पर चलते हैं और पूरे दिन की ज़िम्मेदारी लेते हैं, इसलिए दिन उतना ही रखते हैं जितना आप आराम से कर सकें।