सबसे आसान तरीका: टैक्सी
सामान, बुज़ुर्ग या बच्चे साथ हों तो टैक्सी सबसे आराम की है। रास्ता यमुना एक्सप्रेसवे या NH19 से जाता है, और ड्राइवर उस दिन की भीड़ देखकर तय करता है कि किधर से चलना है। रास्ते में चाय के लिए रुकना हो तो बस बता दीजिए।
एयरपोर्ट से आ रहे हैं तो ड्राइवर पहले से अराइवल पर नाम की तख़्ती लेकर खड़ा रहता है। लंबी उड़ान के बाद यही सबसे बड़ी राहत होती है।
ट्रेन से
मथुरा जंक्शन दिल्ली से आगरा वाली मुख्य लाइन पर है। तेज़ गाड़ियाँ दिल्ली से करीब 1.5 से 2.5 घंटे में पहुँचा देती हैं। मथुरा स्टेशन से वृंदावन 12 किमी है, टैक्सी से करीब आधा घंटा। गाड़ियों का समय IRCTC पर जाँच लें।
बस से
कश्मीरी गेट और आनंद विहार ISBT से मथुरा और वृंदावन की बसें चलती हैं। ट्रैफ़िक के हिसाब से 3.5 से 4.5 घंटे लगते हैं। बस सस्ती है, पर भीड़ रहती है, इसलिए सामान वाले परिवार टैक्सी को तरजीह देते हैं।
कब निकलें
सुबह 5 से 6 बजे निकलने से दिल्ली की भीड़ से बच जाते हैं और बाँके बिहारी जी के दर्शन आराम से हो जाते हैं। मंदिरों के समय मौसम के हिसाब से बदलते रहते हैं, इसलिए निकलने से पहले एक बार पूछ लें। हम श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलने की कोशिश करते हैं, यानी हर जगह धर्म का ध्यान रखना और पूरी यात्रा की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर लेना।