84 कोस यात्रा क्या है
कोस दूरी का पुराना माप है। 84 कोस का घेरा गिनती के तरीके के हिसाब से करीब 250 से 300 किमी बैठता है। यह मथुरा ज़िले से होकर राजस्थान के भरतपुर और हरियाणा के पलवल तक जाता है। परंपरा में बारह वन, चौबीस उपवन और सैकड़ों कुंड और सरोवर गिनाए जाते हैं।
बारह वन
मधुवन, तालवन, कुमुदवन, बहुलावन, काम्यवन, खदिरवन, वृंदावन, भद्रवन, भांडीरवन, बेलवन, लोहवन और महावन। आज इनमें से कई छोटे गाँव के मंदिर और तालाब के रूप में मिलते हैं, और बिना स्थानीय व्यक्ति के कुछ को ढूँढना कठिन है।
मुख्य पड़ाव
- मथुरा और वृंदावन: जन्मस्थान, विश्राम घाट, बाँके बिहारी, निधिवन, केशी घाट।
- गोवर्धन: मानसी गंगा, दान घाटी, राधा कुंड, कुसुम सरोवर।
- बरसाना और नंदगाँव: पहाड़ी पर राधा रानी का मंदिर और नंद बाबा का गाँव।
- कामां (काम्यवन) और चरण पहाड़ी।
- गोकुल, महावन और रावल, जहाँ राधा जी का जन्म माना जाता है।
- बलदेव में दाऊजी का मंदिर।
कितने दिन लगते हैं
मुख्य जगहें गाड़ी से 3 दिन में हो सकती हैं। आराम से दर्शन के लिए 4 से 6 दिन रखिए। पूरी परिक्रमा पैदल करने में संत और पदयात्री हफ़्तों लेते हैं।
बड़ी संगठित यात्राओं की तारीखें हर साल अलग होती हैं और स्थानीय स्तर पर घोषित होती हैं, इसलिए हम अंदाज़े से तारीख़ नहीं बताते। आप अपनी तारीख़ों पर निजी यात्रा चुन सकते हैं, गाड़ी और ड्राइवर हम तय करते हैं। हम गीता में श्रीकृष्ण के बताए रास्ते पर चलते हैं: हर स्थान पर धर्म का पालन और पूरी यात्रा की ज़िम्मेदारी हमारी।