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Hindi24 अक्टू॰ 2026 · 7 मिनट पढ़ें

राधा कुंड और अहोई अष्टमी स्नान

कार्तिक की ठंडी रात में, आधी रात के आसपास, राधा कुंड की सीढ़ियों पर लोग उतरते हैं। पति-पत्नी साथ खड़े होते हैं, अँधेरे जल पर दीप की लौ झिलमिलाती है, और भीड़ एकाएक शांत हो जाती है। कहा जाता है कि यह संतान और प्रेम की कामना की रात है।

यह रात अहोई अष्टमी की है, जिसे राधा कुंड पर बहुलाष्टमी भी कहा जाता है। इस बार वह 1 नवंबर 2026 को है, यानी कुछ ही दिन दूर। इस लेख में हम बताते हैं कि परंपरा क्या कहती है, क्या हम पक्का नहीं जान सके, और सुरक्षा तथा मर्यादा के साथ कैसे जाएँ।

कुंड की कथा

श्रीमद्भागवत (10.36) में कथा है कि कृष्ण ने बैल रूपी अरिष्टासुर का वध किया। गोपियों ने, राधा जी के नेतृत्व में, परिहास किया कि बैल के वध का पाप लगा है और सब तीर्थों में स्नान करना होगा। तब कृष्ण ने एड़ी से धरती पर प्रहार किया और सभी तीर्थों का जल श्याम कुंड में आ गया, जहाँ उन्होंने स्नान किया।

राधा जी और उनकी सखियों ने कंगनों से अपना कुंड खोदा, और कृष्ण ने मानसी गंगा का जल बुलाकर उसे भर दिया। दोनों कुंड पास-पास हैं। यह वृत्तांत पद्म पुराण (उत्तर खंड) और गौड़ीय ग्रंथों में आता है, और माना जाता है कि चैतन्य महाप्रभु ने 1515 में इन कुंडों को पुनः प्रकट किया, जैसा चैतन्य चरितामृत (मध्य लीला 18) में उल्लेख है। हमने इन ग्रंथों की पंक्तियाँ अलग से नहीं जाँची हैं।

अहोई अष्टमी और बहुलाष्टमी

अहोई अष्टमी कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। उत्तर भारत में माताएँ इस दिन संतान के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं। राधा कुंड पर इसी रात को बहुलाष्टमी कहा जाता है, और हमारे स्थान-विवरण के अनुसार हजारों लोग आधी रात को संतान और प्रेम के आशीर्वाद के लिए स्नान करते हैं। यह स्थानीय परंपरा है, और हमें स्नान के नियमों का कोई पुष्ट ग्रंथ-आधारित विवरण नहीं मिला।

एक पंचांग सूची में 2026 की अहोई अष्टमी उत्तर भारत के लिए रविवार, 1 नवंबर बताई गई है, और उसका कुछ समय गणना से निकाला गया है। अष्टमी कहीं एक शाम शुरू होकर अगली शाम समाप्त हो सकती है, इसलिए स्थानीय पंचांग और राधा कुंड के मंदिरों से तिथि और समय पक्का कर लें।

योजना और समय

हमारे पास उस दिन के घंटे-दर-घंटे कार्यक्रम का पुष्ट विवरण नहीं है। सामान्यतः दिन में व्रत और पूजा होती है, और रात में लोग कुंड पर पहुँचते हैं। कुंड के आसपास के मंदिर अपने नियमित सुबह-शाम के समय पर खुलते हैं और पर्व पर समय बढ़ा सकते हैं। पहुँचकर स्थानीय लोगों या सेवक से पूछ लें।

राधा कुंड गोवर्धन की परिक्रमा के मार्ग पर है। मथुरा से गोवर्धन लगभग 25 किलोमीटर है और वहाँ से राधा कुंड कुछ ही दूर। दिवाली का सप्ताह पास है, इसलिए गोवर्धन में भीड़ बढ़ेगी।

सावधानियाँ और सुझाव

रात में पत्थर की सीढ़ियाँ गीली और ठंडी होती हैं और फिसलन का खतरा सच्चा है। रेलिंग पकड़कर धीरे उतरें, बच्चों और बुज़ुर्गों को गहरे किनारे से दूर रखें। सूखा तौलिया और गर्म कपड़े साथ रखें और स्नान के बाद तुरंत लपेट लें। जल की गुणवत्ता की हमने जाँच नहीं की है, इसलिए उसे पिएँ नहीं।

टॉर्च, पानी और चार्ज किया हुआ फोन रखें। समूह में रहें और मिलने की जगह तय कर लें। महिलाओं के कपड़े बदलने की सुविधा की पुष्ट जानकारी हमारे पास नहीं है, इसलिए पहले पूछ लें। अगर तबीयत ठीक न लगे या भीड़ से घबराहट हो, तो स्नान छोड़कर सीढ़ियों से प्रार्थना कर लें; थोड़ा भी तो धर्म है।

रात के स्नान से पहले दिन के उजाले में एक बार कुंड की सीढ़ियाँ देख लें।

ठहरना और भोजन

राधा कुंड के पास कमरे कम हैं और हम किसी का नाम नहीं दे रहे। कई यात्री गोवर्धन नगर, मथुरा या वृंदावन में रुककर रात को आते हैं। दिवाली से कुछ दिन पहले की रात होने के कारण पहले से बुकिंग करें। ठहरने की जगह पर गर्म पानी, हीटर और लौटने के समय की जानकारी पूछ लें।

व्रत रखने वाले लोग तारों के निकलने तक उपवास करते हैं। जो नहीं रखते, वे हल्का भोजन समय पर करें। राधा कुंड के आसपास भोजन पर हमारे शोध में केवल कम भरोसेमंद सूची मिली, अतः कोई नाम नहीं लिख रहे। गर्म चाय सुरक्षित रहती है।

संबंधित गाइड पेज

हमारा अंग्रेज़ी लेख 'Ahoi Ashtami at Radha Kund', गोवर्धन परिक्रमा की पूरी गाइड और कुसुम सरोवर का लेख इस यात्रा से जुड़े हैं। राधा कुंड और श्याम कुंड के अलग पन्नों पर भी जानकारी है।

lala:Cab से मदद

lala:Cab का ड्राइवर रात के लिए बाहर के स्थान पर गाड़ी रोककर इंतज़ार करेगा, कंबल और पानी रखेगा, और लौटते समय रास्ता जानता है। एक गाइड अरिष्टासुर और दोनों कुंडों की कथा कुंड के किनारे सुना सकता है, ताकि रात श्रद्धा से भरी रहे, केवल ठंड से नहीं।

आपके सवाल

2026 में अहोई अष्टमी कब है?

एक पंचांग सूची रविवार 1 नवंबर 2026 बताती है। स्थानीय पंचांग से पक्का करें।

राधा कुंड पर आधी रात को स्नान क्यों करते हैं?

परंपरा के अनुसार बहुलाष्टमी की रात, संतान तथा प्रेम की प्रार्थना के साथ।

क्या स्नान के नियम किसी ग्रंथ में हैं?

किसी ग्रंथ में ऐसे नियम हमें नहीं दिखे। यह लोक-परंपरा है।

क्या कुंड का जल सुरक्षित है?

गुणवत्ता की जाँच नहीं हुई है। स्नान सावधानी से करें और जल पिएँ नहीं।

स्थानीय रूप से जाँच लें

समय, नियम और शुल्क बदलते रहते हैं। कृपया उसी दिन मंदिर या अपने ड्राइवर से पुष्टि कर लें।

  • 2026 की तिथि और समय स्थानीय पंचांग से
  • स्नान के नियम और महिलाओं के लिए सुविधा
  • जल की गुणवत्ता
  • पद्म पुराण और चैतन्य चरितामृत के उद्धरण
स्रोत
इस कथा के स्थान

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